Purushatva aur Prem Sambandh: Main Aapka Jeevan Badal Sakta Hoon (Paperback)

SHRUTI ARORA​

आपको पढ़ाई करना सिखाया गया। कमाना सिखाया गया। एक अच्छा बेटा बनना सिखाया गया।

लेकिन ये बातें किसी ने नहीं सिखाईं।

किसी ने आपको बैठाकर यह नहीं समझाया कि किसी स्त्री के साथ जीवन बिताने का निर्णय लेने से पहले उसे कैसे समझें। किसी ने आपको बचपन में बने व्यवहार के उन आदतों के प्रति सचेत नहीं किया, जो आगे चलकर आपके हर रिश्ते में दोहराए जाते हैं। किसी ने यह अंतर नहीं बताया कि आपसे प्रेम करने वाली स्त्री और आपको अपने हिसाब से चलाने वाली स्त्री में क्या फर्क होता है। किसी ने नहीं समझाया कि आखिर कौन-सी बातें एक विवाह को भीतर से तोड़ देती हैं, प्रेम संबंध टूटने का पुरुष के मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है, समझदार लोग भी किस तरह भावनात्मक जोड़-तोड़ का शिकार हो जाते हैं, या गलत व्यक्ति के लिए आप जितना अधिक करते हैं, उसकी नज़रों में आपका सम्मान उतना ही कम क्यों होता जाता है।

यह पुस्तक वही बातचीत है, जो आपसे कभी नहीं की गई।

यह कोई प्रेरक पुस्तक नहीं है। न ही यह केवल दिलासा देने वाली ऐसी स्व-सहायता पुस्तक है, जिसे पढ़कर आप एक सप्ताह तक अच्छा महसूस करें, लेकिन जीवन में कुछ भी न बदले। यह वह पुस्तक है, जिसकी ज़रूरत एक पुरुष को तब पड़ती है, जब वह किसी कठिन दौर से गुज़र रहा हो और चाहता हो कि कोई उसे सच बताए।

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About the Author

Rajneesh Kumar
Rajneesh Kumar

Rajneesh Kumar is a Consultant Psychologist with over 25 years of counselling experience, based in Chandigarh

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Book Details

Author: Rajneesh Kumar
Pages: 217
Format: Paperback
Language: Hindi
ISBN: 9788165200022
Category: SELF-HELP / Personal Growth / Success